एथनॉल वाले ईंधन पर एक्साइज ड्यूटी हटाई

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Odd Andersen/AFP/Getty Images

📅 june 12, 2026 • 11:00 PM

"केंद्र का बड़ा फैसला: ज्यादा एथनॉल वाले पेट्रोल से हटी एक्साइज ड्यूटी, जानिए आप पर क्या असर पड़ेगा"

"यह छूट ऐसे समय में दी गई है जब भारत आयातित कच्चे तेल (क्रूड ऑयल) पर निर्भरता कम करने और स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए अपने जैव ईंधन (Biofuel) कार्यक्रम का विस्तार कर रहा है।"

केंद्र ने ज्यादा एथनॉल वाले पेट्रोल से हटाई एक्साइज ड्यूटी, जानिए आप पर क्या असर पड़ेगा

नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने ज्यादा मात्रा में एथनॉल मिलाए गए पेट्रोल पर एक्साइज ड्यूटी हटाने का फैसला लिया है। यह कदम मौजूदा E20 ईंधन मानक से आगे बढ़ते हुए एथनॉल ब्लेंडिंग को बढ़ावा देने के लिए उठाया गया है।

22% से 30% एथनॉल वाले पेट्रोल को मिली छूट

सरकारी अधिसूचना के अनुसार, 22 प्रतिशत से 30 प्रतिशत तक एथनॉल मिश्रित पेट्रोल पर अब एक्साइज ड्यूटी नहीं लगेगी। इसमें E22, E25, E27 और E30 जैसे ईंधन शामिल हैं।

यह E20 से ज्यादा एथनॉल मिश्रण वाले पेट्रोल के लिए पहली बड़ी वित्तीय प्रोत्साहन योजना मानी जा रही है।

सरकार का उद्देश्य क्या है?

यह फैसला भारत के जैव ईंधन कार्यक्रम को आगे बढ़ाने के लिए लिया गया है। सरकार का लक्ष्य आयातित कच्चे तेल पर निर्भरता कम करना और देश में बने स्वच्छ ऊर्जा स्रोतों को बढ़ावा देना है।

उच्च एथनॉल मिश्रण के लिए तैयारी शुरू

पेट्रोलियम मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार, ज्यादा एथनॉल वाले ईंधन को लागू करने से पहले कई तरह की जांच और सलाह प्रक्रिया पूरी की जा रही है।

सरकार का कहना है कि यह कदम नए BIS मानकों के अनुरूप है, हालांकि उच्च एथनॉल मिश्रण वाले ईंधन को बड़े स्तर पर लागू करने का अंतिम फैसला अभी नहीं लिया गया है।

E20 के बाद अब आगे की तैयारी

भारत का एथनॉल ब्लेंडिंग कार्यक्रम तेजी से आगे बढ़ रहा है। सरकार ने पहले पेट्रोल में 20 प्रतिशत एथनॉल मिश्रण (E20) का लक्ष्य रखा था, जिसे अब हासिल करने की दिशा में तेजी आई है।

नए BIS मानकों में E22, E25, E27 और E30 पेट्रोल के लिए एथनॉल मात्रा, ऑक्टेन रेटिंग, सल्फर सीमा और सुरक्षा नियमों को तय किया गया है।

भारत में एथनॉल कार्यक्रम की प्रगति

भारत की जैव ईंधन नीति साल 2018 में शुरू हुई थी और 2022 में इसमें बदलाव किए गए। इसके तहत पेट्रोल में 20 प्रतिशत एथनॉल मिश्रण का लक्ष्य तय किया गया।

एथनॉल ब्लेंडिंग के आंकड़े लगातार बढ़े हैं:

  • ESY 2022-23 में 12.06 प्रतिशत
  • ESY 2023-24 में 14.60 प्रतिशत
  • ESY 2024-25 में 17.98 प्रतिशत तक

एथनॉल क्यों जरूरी है?

भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा कच्चे तेल के आयात से पूरा करता है। ऐसे में एथनॉल को सरकार आयात कम करने और घरेलू ऊर्जा को बढ़ावा देने के एक महत्वपूर्ण विकल्प के रूप में देख रही है।

एथनॉल मिश्रित पेट्रोल से तेल आयात पर खर्च कम हो सकता है और किसानों, ग्रामीण क्षेत्रों तथा घरेलू उद्योगों को भी फायदा मिल सकता है।

ज्यादा एथनॉल वाले ईंधन पर सवाल

E20 पेट्रोल के इस्तेमाल के बाद कुछ वाहन मालिकों ने ईंधन की क्षमता, माइलेज और इंजन पर असर को लेकर चिंता जताई थी।

हालांकि सरकार का कहना है कि उच्च एथनॉल मिश्रण को लागू करने से पहले तकनीकी जांच और सुरक्षा मानकों का ध्यान रखा जा रहा है।

आपके लिए क्या मतलब है?

आने वाले समय में ज्यादा एथनॉल वाला पेट्रोल भारत में ऊर्जा विकल्पों को बदल सकता है। इससे पेट्रोलियम आयात कम करने और स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देने में मदद मिल सकती है।